धर्माध्यक्ष सेवा का जीवन जीने के लिए बुलाया जाता है, पोप फ्रांसिस। 

संत पिता फ्राँसिस ने रविवार को संत पेत्रुस महागिरजाघर में पवित्र मिस्सा के दौरान दो नए धर्माध्यक्षों का अभिषेक किया, उन्हें बताया कि उनका जीवन दूसरों की सेवा और निकटता के लिए है।
संत पिता फ्राँसिस ने दो धर्माध्यक्षीय अभिषेक के अवसर पर मिस्सा के दौरान अपने प्रवचन में, उस भूमिका पर विचार किया जिसे वे कलीसिया में निभाने के लिए बुलाये गये हैं।
संत पेत्रुस महागिरजाघर में, उन्होंने उन बारह प्रेरितों से प्रेरणा ली, जिन्हें येसु ने दुनिया में भेजा था ताकि वे सभी लोगों के बीच सुसमाचार की घोषणा कर सकें, जिससे उन्हें मुक्ति मिले।
संत पिता फ्राँसिस ने कहा कि "इस प्रेरितिक सेवकाई को पीढ़ी दर पीढ़ी बनाए रखने के लिए, बारहों ने सहकर्मियों को एक साथ इकट्ठा किया, उनपर हाथ रख कर उन्हें मसीह से प्राप्त आत्मा के उपहार को प्रेषित किया, जिसने पुरोहिताई संस्कार की पूर्णता प्रदान की।”
इस प्रकार, "कलीसिया की जीवित परंपरा में धर्माध्यक्षों के निरंतर उत्तराधिकार के माध्यम से, इस पुरोहिताई संस्कार को संरक्षित किया गया है और उद्धारकर्ता का कार्य आज भी जारी है और विकसित होता है।"
नए धर्माध्यक्ष गुइदो मारिनी और धर्माध्यक्ष एन्ड्रेस गेब्रियल फेराडा मोरेरा का "खुशी और आभार" के साथ स्वागत करते हुए, संत पापा फ्राँसिस ने उन्हें बताया कि उन्हें सेवा के जीवन के लिए चुना गया है। अपनी सलाह देते हुए, संत पापा ने उनसे कहा कि "हर अवसर पर वचन का प्रचार करें," अध्ययन जारी रखें और अपने झुंड के करीब रहें।
उन्होंने कहा "आप कलीसिया में विश्वास, सेवा, दान के संरक्षक होंगे" और इस कारण से, आप ईश्वर के करीब रहना है, उनकी "करुणा और कोमलता" को दर्शाना है।
संत पिता फ्राँसिस ने रेखांकित किया कि एक धर्माध्यक्ष का पहला कार्य "प्रार्थना में ईश्वर के करीब" होना है, उन्हें "तोते की तरह" प्रार्थना नहीं, बल्कि "दिल से प्रार्थना" करना है।
संत पिता फ्राँसिस ने कहा, उनका दूसरा कार्य, "अन्य धर्माध्यक्षों" के करीब रहना है और अपने भाई के बारे में कभी भी बुरा नहीं बोलना।
तीसरा, उन्होंने धर्माध्यक्षों से आग्रह करते हुए कहा कि वे यह न भूलें कि पुरोहित उनके निकटतम पड़ोसी हैं। संत पापा ने उन्हें पिता की तरह अपने पुरोहितों के लिए उपलब्ध होने के लिए भी आमंत्रित किया।
अंत में, संत पिता फ्राँसिस ने रेखांकित किया कि धर्माध्यक्षों के लिए अपने झुंड के निकट होना महत्वपूर्ण है, उन्हें याद दिलाया कि उन्हें भी, "झुंड से ही लिया गया है।"
अंत में, संत पिता फ्राँसिस ने प्रार्थना की कि ये नए धर्माध्यक्ष प्रभु का अनुसरण करते हुए निकटता के इस मार्ग पर आगे बढ़ें "क्योंकि प्रभु हमेशा हमारे करीब रहे हैं और हमेशा हमारे करीब हैं।"

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