काम की प्रतिष्ठा को बढ़ावा देने से कभी नहीं थकूँगा, पोप।

संत पिता फ्रांसिस ने अर्जेंटीना के आईडिया फाऊँडेशन और लोकप्रिय अर्थव्यवस्था के श्रमिकों के संघ को एक संदेश भेजा, जिसका उद्देश्य श्रमिकों और उनके परिवारों की गरिमा और अधिकारों की रक्षा करते हुए व्यवसाय के विकास के लिए स्थायी समाधान खोजना है।
संत पिता फ्रांसिस ने आईडिया फाऊँडेशन और लोकप्रिय अर्थव्यवस्था के श्रमिकों के संघ की 57वीं सभा के अवसर पर संघ के सदस्यों को एक वीडियो संदेश भेजकर उनके बीच वार्ता की सराहना की।
सभा की विषयवस्तु है "आइये हम एक सतत् अर्जेंटीना का निर्माण करें।" यह 13 से 15 अकटूबर तक बोएनोस आयरिस में आयोजित है।  
इस साल की सभा का उद्देश्य है देश के बेहतर सामाजिक एकीकरण, विकास और तरक्की के मद्देनजर निजी रोजगार पर विचार करना।
आईडिया अर्जेंटीना में व्यापार विकास की संस्था है। इसने 1974 से ही हर साल राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय व्यापार नेताओं, सरकार, अधिकारी, गैरसरकारी संगठनों के नेताओं और व्यापार संघ के नेताओं को एक साथ लाया है ताकि नये विचारों पर बहस किया जा सके एवं वास्तविकता में बदलाव लाने के लिए नेताओं को कदम उठाने हेतु प्रेरित कर सके।
उन्होंने कहा, "मैं विचार के लिए जगह की सराहना करना चाहता हूँ जिसको आइडिया फाउंडेशन और लोकप्रिय अर्थव्यवस्था के श्रमिकों के संघ ने प्रस्तावित किया है। मैं ईमानदारी से चाहता हूँ कि यह प्रामाणिक आदान-प्रदान का क्षण हो जो उन उद्यमियों और श्रमिकों की नई सोच को एकत्र कर सके जो अपनी गरिमा और अपने परिवारों के लिए संघर्ष करते हैं।"
संत पिता फ्रांसिस ने उद्यमियों की बुलाहट की याद दिलाते हुए कहा कि यह रचनात्मक रूप से धन का उत्पादन करने और उत्पादन में विविधता लाने की कोशिश करता है, साथ ही नौकरी के अवसर उत्पन्न करता है।
संत पिता फ्रांसिस ने काम की प्रतिष्ठा की ओर ध्यान आकृष्ट करते हुए कहा कि काम को प्रतिष्ठा कौन देता है। जिनके पास नौकरी नहीं है वे कुछ चीज के खोने का एहसास  करते हैं वे उस प्रतिष्ठा की कमी महसूस करते हैं जिसको नौकरी प्रदान करती है। कार्य, मानव प्राणी की प्रतिष्ठा को प्रकट करता एवं बढ़ाता है उसे ईश्वर प्रदत्त क्षमता में विकसित कराता, संबंध स्थापित करने में मदद देता, उसे इस दुनिया की देखभाल एवं विकास करने में ईश्वर के सहयोगी होने का एहसास दिलाता है। उसे समाज के लिए उपयोगी और उन लोगों के साथ एकजुटता का अनुभव कराता है जिनकी वे परवाह करते हैं। यही कारण है कि कठिनाइयों और परेशानियों से परे कार्य ही परिपक्वता का मार्ग है, व्यक्ति होने का एहसास है, जो श्रेष्ठ सपनों को पंख देता है।
संत पिता फ्रांसिस ने कहा कि इस रास्ते पर मैं मानता हूँ कि उद्यमी और श्रमिक न केवल अपरिहार्य हैं, बल्कि उपयोगी और आशाजनक भी हैं। अंत में उन्होंने उन्हें अपना प्रेरितिक आशीर्वाद प्रदान किया।

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