अंतर-पीढ़ी संतुलन के बिना कोई सतत विकास नहीं। 

यूरोप में काथलिक परिवार संघों के महासंघ के अध्यक्ष भिंचेंसो बस्सी ने इटली और स्पेन में जनसांख्यिकीय शीत पर संत पापा फ्रांसिस की चिंता की ओर ध्यान आकृष्ट किया है तथा समाज में परिवार की भूमिका को प्रोत्साहन एवं पहचान देनेवाले उपायों की आवश्यकता पर प्रकाश डाला है।
संत पिता फ्राँसिस ने बार-बार परिवार की रक्षा करने, जनसांख्यिकीय संकट वाले देशों में जन्म दर में सुधार और पीढ़ीगत स्थिरता को बढ़ावा देने के महत्व पर प्रकाश डाला है।
परिवार संघ के लिए गठित मंच द्वारा आयोजित "जन्म के सामान्य दर" पर मई में हुई सभा में, संत पापा ने जोर दिया था कि "एक समाज जो जीवन का स्वागत नहीं करता, जीना बंद कर देता है।" उन्होंने इताली समाज को प्रोत्साहन दिया था कि वे जीवन एवं मानव व्यक्ति से शुरू करते हुए आगे बढ़ें।
उसी तरह जीवन के लिए 43वें इताली दिवस पर 7 फरवरी 2021 को पोप फ्राँसिस ने "जनसांख्यिकीय शीत" के लिए चिंता व्यक्त करते हुए इटलीवासियों का आह्वान किया था कि वे इसपर ध्यान दें तथा सुनिश्चित करें कि जनसांख्यिकीय शीत का अंत हो और नये शिशुओं के साथ नया बसंत आये।  
हाल ही में, हंगरी और स्लोवाकिया की अपनी 34वीं प्रेरितिक यात्रा के समापन पर ब्रातिस्लावा से रोम के लिए उड़ान भरते हुए पत्रकारों के साथ बातचीत के दौरान, संत पापा ने एक बार फिर इस विषय पर बात की थी, और  इटली एवं स्पेन में जनसांख्यिकीय शीत के बारे में चिंता व्यक्त की थी।
हंगरी के राष्ट्रपति जानोस देर के साथ मुलाकात से संबंधित एक पत्रकार के सवाल का उत्तर देते हुए संत पापा ने याद किया कि राष्ट्रपति ने हंगरी के एक नियम के बारे बतलाया जिसका उद्देश्य है युवा दम्पतियों को विवाह करने एवं बच्चों को जन्म देने के लिए प्रोत्साहित करना। संत पापा ने आगे याद किया कि फ्रांस में भी इसी तरह का कानून है हालांकि उन्होंने कहा कि हंगरी इसमें अधिक आगे है।     
संत पिता फ्राँसिस ने यह भी गौर किया कि हंगरी में अधिक युवा और बच्चे उपस्थित थे तथा कहा कि उनके लिए चुनौती नौकरी पाने की हो सकती है जिसपर उन्हें ध्यान देना चाहिए ताकि वे नौकरी पाने के लिए विदेश न जाएँ।   
यूरोप के लिए काथलिक परिवार संघों के महासंघ के अध्यक्ष भिन्चेंसो बस्सी ने वाटिकन न्यूज के साथ एक साक्षात्कार में, संत पापा की जनसांख्यिकीय चिंता पर प्रकाश डाला।
जनसांख्यिकीय शीत के महत्वपूर्ण मुद्दे की ओर ध्यान आकृष्ट करने के लिए संत पापा के प्रति आभार प्रकट करते हुए बस्सी ने कहा कि यह पूरे यूरोप की समस्या है जिसने हंगरी और फ्रांस जैसे देशों को कारर्वाई करने के लिए प्रेरित किया है।
उन्होंने कहा कि जनसांख्यिकीय समस्या केवल "आज के लिए एक प्रश्न" नहीं है, बल्कि भविष्य के लिए भी महत्वपूर्ण है - "हमारे देश, हमारे महाद्वीप के भविष्य के लिए।"
लौदातो सी में संत पिता फ्राँसिस के शब्दों की याद करते हुए बस्सी ने कहा कि "हम अंतर-पीढ़ी संतुलन के बिना कोई सतत विकास प्राप्त नहीं कर सकते" क्योंकि नई पीढ़ियों के बिना, देश विफल हो सकता है।
बस्सी ने कहा कि हंगरी सरकार द्वारा स्थापित महत्वपूर्ण केंद्रीय सिद्धांत सर्वजनिक हित की दिशा में काम करने में "परिवार और माता-पिता की भूमिका की मान्यता" है।
उन्होंने कहा कि हंगेरियन और फ्रांसीसी सरकारों द्वारा किए गए उपाय "परिवार और बच्चों को एक निवेश के रूप में मानते हैं, न कि एक व्यय के रूप में।"
उन्होंने निष्कर्ष निकाला, कि यह अन्य यूरोपीय देशों के लिए एक अच्छा उदाहरण हो सकता है, खासकर इसलिए कि यह परिवार की जरूरतों को निर्धारित करने में नागरिक समाज को शामिल करता है।

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