श्रीलंका, मुत्तुराजवेला विकास योजना के विरुद्ध कार्डिनल रंजित। 

श्रीलंका के काथलिक धर्माधिपति कोलोम्बो के महाधर्माध्यक्ष कार्डिनल मेलकम रंजित ने सरकार की मुत्तुराजवेला विकास योजना के विरुद्ध अपनी आवाज़ बुलन्द करते हुए कहा है कि इससे पर्यावरण तथा वनस्पति और जीव को भारी क्षति पहुँचेगी। श्रीलंका सरकार ने मुत्तुराजवेला आर्द्रभूमि पर एक तरलीकृत प्राकृतिक गैस (एलएनजी) बिजली संयंत्र परियोजना का प्रस्ताव किया है। सरकार की योजना लगभग 405,000 वर्ग मीटर आर्द्रभूमि को समुद्री रेत से भरने की है। कोलोम्बो से लगभग तीस किलोमीटर की दूरी पर स्थित मुत्तुराजवेला आर्द्रभूमि वनस्पति और जीव सम्बन्धी समृद्ध विविधता वाला क्षेत्र है, जिसमें जानवरों की 209 प्रजातियाँ, मछलियों की 40, सरीसृपों की 31, पक्षियों की 102, तितलियों की 48 और मैंग्रोव की 18 प्रजातियों सहित पेड़ों की 194 प्रजातियाँ शामिल हैं। श्री लंका की पर्यावरणीय एजेन्सी को लिखे एक पत्र में कार्डिनल रंजित  ने कहा कि वनस्पति एवं जीव को क्षति पहुँचाने के साथ साथ सरकार की उक्त परियोजना कई स्थानीय जनजातियों से उनकी जीविका के साधन छीन लेगी।
कार्डिनल महोदय ने इस बात पर चिन्ता व्यक्त की कि सरकार की उक्त परियोजना में स्थानीय लोगों की आवश्यकताओं पर ध्यान नहीं दिया गया। लोगों को केवल 30 दिन का समय दिया गया है ताकि वे इस विषय में अपनी राय दें। उन्होंने कहा कि इस प्रकार का प्रस्ताव अस्वीकार्य है इसलिये कि लॉकडाऊन के समय किसी से भी सलाह-मशवरा करने का कोई साधन नहीं है।  
कार्डिनल रंजित ने कहा कि सरकार को यह कदापि नहीं भूलना चाहिये कि देश न तो राष्ट्रपति का है और न ही मंत्री मण्डल का बल्कि देश लोगों का है। ग़ौरतलब है कि अभी कुछ ही दिनों पूर्व कार्डिनल रंजित ने स्थानीय मछुओं के पक्ष में अपनी आवाज़ उठाई थी। दो जून को श्री लंका के समुद्री तट पर सिंगापुर के पोत एमवी एक्स प्रेस पर्ल के जलमग्न होने से मछुओं को भारी नुकसान पहुँचा था।  

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