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महामारी के बाद किसी को भी पीछे न छोड़ा जाये, परमधर्मपीठ।
वाटिकन के वरिष्ठ महाधर्माध्यक्ष इवान यूरकोविट्स ने एक वकतव्य जारी कर धनाढ्य राष्ट्रों से आग्रह किया है कि कोविड -19 महामारी से उत्पन्न संकट का प्रत्युत्तर देते समय वे किसी को भी पीछे न छोड़ें।
जिनिवा स्थित संयुक्त राष्ट्र संघीय कार्यालय में परमधर्मपीठ के स्थायी पर्यवेक्षक महाधर्माध्यक्ष इवान यूरकोविट्स ने बुधवार को, मानवाधिकार समिति के 45 वें सदन में कहा कि परमधर्मपीठ स्वीकार करती है कि कोविद महामारी ने समाज एवं विश्व की अर्थव्यवस्थाओं को गम्भीर रूप से प्रभावित किया है, और इसीलिये वह संयुक्त राष्ट्र के सदस्य राष्ट्रों से आग्रह करती है कि इस आपात स्थिति का प्रत्युत्तर देते समय वे किसी को भी पीछे न छोडें।
विकास का अधिकार :- इस बात पर बल देते हुए कि सभी को विकास का अधिकार है, महाधर्माध्यक्ष ने कहा कि सामाजिक सेवाओं को निष्पक्ष और पारदर्शी होना चाहिये तथा इस क्षेत्र में किसी भी प्रकार के दुरुपयोग से बचने के लिये निगरानी रखी जानी चाहिये। उन्होंने कहा कि आपातकाल के समय अनुकूल राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय परिस्थितियों के निर्माण की प्राथमिक जिम्मेदारी राष्ट्रों की है, जिसके लिये "एक विश्वव्यापी दृष्टिकोण" की ज़रूरत है, जो कमज़ोर एवं निर्धन लोगों के पक्ष में नीतियों को निर्मित करने के लिये तत्पर रहे। उन्होंने कहा कि संसाधनों का न्यासंगत वितरण विकास की मौलिक शर्त है। उन्होंने कहा कि मानव के अखण्ड विकास के लिये तथा मानव गरिमा को प्रतिष्ठापित करने हेतु इसकी नितान्त आवश्यकता है।
एक मानव परिवार :- महाधर्माध्यक्ष यूरकोविट्स ने कहा, "यह संपूर्ण मानव परिवार को एक साथ लाने का समय है ताकि धारणीय एवं अखण्ड विकास की तलाश की जा सके, जो विशेष हितों के स्वार्थ और अतीत में लौटने के प्रलोभन का एकमात्र विकल्प है।" उन्होंने कहा कि यदि ऐसा नहीं हुआ तो शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व और भावी पीढ़ियों का विकास गंभीर रूप से जोखिम में पड़ जायेगा।
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