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भाई एक उपहार के समान!
संत फ्राँसिस असीसी में भ्रातृत्व कोई अस्पष्ट सिद्धांत नहीं है बल्कि हरेक व्यक्ति के लिए ईश्वर का एक ठोस वरदान है। असीसी के गरीब (फ्राँसिस) हमें याद दिलाते हैं कि हम सच्चे भाई नहीं हो सकते यदि हम अपने आपको पिता ईश्वर की संतान के रूप में नहीं पहचानते हैं।
संत फ्राँसिस असीसी संत पापा को प्रेरित करते हैं जिन्होंने इतिहास में पहली बार अपने लिए उनके नाम को चुना। यदि पाँच साल पहले, सृष्टि के लिए ईश्वर स्तुति ने लौदातो सी को आत्मा प्रदान की तो इस बार भ्रातृत्व (और सामाजिक मित्रता) संत पापा के नये दस्तावेज के आकर्षण का केंद्र है। जिस पर 3 अक्टूबर को गरीब (फ्राँसिस) की भूमि पर हस्ताक्षर करेंगे। किन्तु संत फ्राँसिस के लिए भाई कौन हैं? एक अंतरंग और प्रकट करने वाला जवाब इस व्यवस्थान के शुरू में है जहाँ कोढ़ी व्यक्ति से मुलाकात करने के बाद, जिनसे ख्रीस्त ने उन्हें मिलाया क्योंकि लोग उन्हें घृणा की नजर से देखते थे वे कहते हैं, "और जब ईश्वर ने मुझे भाई प्रदान किये, मुझे किसी ने नहीं दिखाया कि मुझे क्या करना चाहिए किन्तु स्वंय सर्वोच्च ईश्वर ने प्रकट किया कि मुझे सुसमचार के अनुसार जीना है।"
अतः संत फ्राँसिस के लिए भाई सबसे बढ़कर ईश्वर के दान हैं। एक अप्रत्याशित उपहार और सच्चाई को प्रकट करना कष्ट से रहित नहीं होते क्योंकि वे नई परिस्थिति लाते हैं। यह हमें ईश्वर से कृपा की याचना करने हेतु प्रेरित करता है क्योंकि कोई नहीं जानता कि क्या करना चाहिए। वे हमारी जीत नहीं हैं और न ही हमारी पसंद अनुसार हैं। वे सृष्टिकर्ता की जीवित कृति हैं और हमें मुफ्त में प्रदान किये गये हैं। वे भेंट किये गये हैं अतः हम उनका चुनाव नहीं कर सकते अथवा उन पर अधिकार नहीं कर सकते बल्कि केवल उनका स्वागत कर सकते और वे जैसे हैं उसी तरह उनकी कमजोरियों एवं पृथकताओं के साथ उनसे प्रेम कर सकते हैं। वे पृथकताएँ जिनको प्रभु ही प्रदान करते हैं क्योंकि जैसा कि संत पापा कहते हैं, "सामंजस्य हम नहीं बल्कि पवित्र आत्मा लाते हैं।"
संत फ्राँसिस असीसी में क्या स्पष्ट झलकता है और इस मौलिक लेखन में पृथ्वी पर उनके जीवन के अंतिम दृष्टान्त में क्या पुष्ट होती है वह है कि भ्रातृत्व उनके लिए एक विचारधारा नहीं, एक अस्पष्ट सिद्धांत नहीं बल्कि ठोस सच्चाई है, जीवन बदल देने का अनुभव है। यह प्रसांगिक है क्योंकि इसका स्रोत है। हम पाते हैं कि संत फ्राँसिस के लिए कोई भाई नहीं होता, यदि वह पिता के पुत्र होने के आम संबंध को नहीं पहचानता है। हम सभी भाई-बहन हैं क्योंकि हम सभी एक ही पिता के बच्चे हैं। अतः कोई भी किसी के लिए विदेशी नहीं है। संत फ्राँसिस के जीवन में परिप्रेक्ष्य की एक क्रांति जिसने मिस्र के सुलतान से मुलाकात करने हेतु उन्हें एक अनोखा चुनाव करने के लिए प्रेरित किया। यहीं संत फ्राँसिस के मन-परिवर्तन का केंद्रविन्दु है और उन महिलाओं और पुरूषों के लिए भी जिन्होंने येसु ख्रीस्त का गहरा अनुभव किया है। वास्तव में, यदि पिता के इस प्रेम योजना को न पहचाना जाए तो हमारे लिए काफी नहीं होगा कि हम भाई अथवा बहन हो पायेंगे। शारीरिक दृष्टिकोण से भी नहीं क्योंकि खून का रिश्ता ही वास्तव में हाबिल को मार डाला। काईन ने उसे मार डाला क्योंकि घृणा ने उसकी आंखों को बंद कर दिया था जो पिता के प्रेम को देख नहीं पाया और न ही अपने भाई को पहचान पाया।
फिर भी, संत फ्राँसिस असीसी के लिए भातृत्व एक स्थिर उपहार नहीं है, अपने आप में अंत भी नहीं है। यह उदारता के द्वारा पोषित होती एवं बढ़ती है और यह हमेशा शांति लाती है। भाई-बहनों के साथ संबंध रास्ता दिखलाता है, एक प्रणाली शुरू करता है जो सामुदायिक आयाम का रूप ले लेता है। अपने भाई के साथ मिलने के बाद ही प्रभु ने उनके लिए प्रकट किया कि उन्हें सुसमाचार के अनुरूप जीना है।
इटली के संत (फ्राँसिस असीसी) दूसरों की चिंता अपने आपके समान करते थे जो एक विशेषाधिकार प्राप्त तरीका और सुसमाचार प्रचार के लिए स्थान बन गया। अतः कोई भी भाई ऐसा न हो जो एकाकी की स्थिति में जीने के लिए मजबूर हो। यदि ऐसा हुआ तो यह एक विराधाभास होगा। फ्राँसिस असीसी के लिए पिता के प्रेम के बराबर ही भाई के लिए प्रेम विकसित होता है जिनके चेहरे से हमें पता चलता है कि निर्माता की ताकत मजबूत होती है। संत फ्राँसिस में यह प्रेम पूरे विश्व में फैल गया क्योंकि इस भाईचारा के कारण वे हर सृष्टि, चाहे वह सूर्य हो अथवा चंद्रमा उन्हें भाई और बहन पुकारते हैं।
8 शताब्दी के बाद, स्वार्थ में वृद्धि तथा हर प्रकार के घेरे बनाये जाने के बावजूद दुनिया, भ्रातृत्व एवं पितृत्व की प्यासी है। यह लगातार इसकी खोज कर रही है। असीसी के संत फ्राँसिस जो सभी लोगों के भाई बनना चाहते थे यह बहुत सामयिक है एवं हमसे अपील करती है कि हम दूसरे फ्राँसिस (पोप) के साथ भ्रातृत्व के रास्ते पर चलें।
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