जज़्बा 

पुलिसपुलिस

आज-कल सोशल मीडिया पर एक वीडियो बहुत वायरल हो रहा है। जिसमें पुलिस वाले लॉकडाउन में बेमतलब के बाहर सड़क पर घूम रहे लोगो को जबरदस्ती एम्बुलेंस में एक कोरोना मरीज के साथ रख रहे है। वास्तव में यह सिर्फ एक मजाक था और एम्बुलेंस में कोई कोरोना का मरीज नही था बस लोगो को कोरोना के प्रति सचेत करने के लिए यह खेल खेला गया। जिसमें पुलिस बेवजह घूमने वालों के साथ जबरदस्ती कर उनको एम्बुलेंस में भर रही थी। उस वीडियो में कोई भी व्यक्ति कोरोना वायरस के डर के कारण एम्बुलेंस के अंदर जाना नही चाह रहा था। पुलिस ज़ोर जबरदस्ती कर उनको अंदर कर रही थी और वो उनसे बचने के लिए और वहाँ से भागने के लिए भरपूर कोशिश कर रहे थे। और जब पुलिस वालों ने मिलकर 3-4 लोगों को एम्बुलेंस में भर दिया तो वो लोग कोरोना वायरस के डर के कारण अपनी जान बचाने के लिए एम्बुलेन्स की खिड़की से निकलकर भाग रहे थे। और एम्बुलेंस में उपस्थित तथाकथित कोरोना मरीज से पीछा छुड़ाने और दूर रहने की हर संभव कोशिश कर रहे थे। और जब वे खिड़की से बाहर आये तो वे अपनी गाड़ी वही छोड़कर भाग निकले।
खैर यह तो एक मजाकिया वीडियो था जिसके माध्यम से पुलिस लोगों को कोरोना संकट के खिलाफ जागरूक कर रही थी। यहाँ मैंने एक महत्वपूर्ण चीज़ पर ध्यान दिया कि कोई भी व्यक्ति एम्बुलेन्स में उस तथाकथित कोरोना मरीज के साथ एक पल भी बिताना नही चाहता था और अपनी जान बचाने के लिए एवं उनसे दूर रहने के लिए हर संभव कोशिश कर रहा था। इसके बाद मेरे जेहन में उन डॉक्टरों, नर्सों एवं स्वास्थ्य कर्मियों का ख़्याल आता है जो कि कोरोना मरीजों के साथ एक ही कमरे में पूरा-पूरा दिन बिताते हैं। वे किस प्रकार इन कोरोना संक्रमित व्यक्तियों  का इलाज कर रहे है? अगर देखा जाए तो यह प्रश्न गहन तौर पर विचार करने योग्य है। क्योंकि हमारे देश के डॉक्टर की हालत किसी से छुपी नही है। डॉक्टर, नर्स एवं समस्त स्वास्थ्य कर्मी बिना किसी Personal protective equipment (PPE) के कार्य कर रहे है। अपनी जान की परवाह किये बिना हमारे स्वास्थ्य कर्मी अपनी सेवा हमें प्रदान कर रहे है। वो मरीजों को स्वस्थ करने के लिए हर संभव कोशिश कर रहे है। 
यह खबर दिल दहला देने वाली है कि पूरे विश्व में हज़ारों की संख्या में कोरोना संकट में लोगों का इलाज़ करते हुए डॉक्टरों, नर्सों एवं स्वास्थ्य कर्मियों की जान गई है। यह आँकड़े किसी भी डॉक्टर के मनोबल को तोड़ सकते है। फिर भी अपनी जान को जोखिम में डालकर वे अपनी सेवा औरों को दे रहे है।
मैं यह नही कर रहा हूँ कि इस कठिन समय में सिर्फ डॉक्टर्स ही काम कर रहे है या सिर्फ उनके ही काम में खतरा है। मैं बस इतना ही कह रहा हूँ कि बाकी पेशे में लोग कोरोना वायरस के इतने करीब नही है जितने की डॉक्टर्स है। डॉक्टर्स एवं नर्स को संक्रमित होने का सबसे ज्यादा खतरा है। और इस खतरे को जानते हुए वो आगे आकर हमारे लिए कोरोना वायरस के खिलाफ अपनी लड़ाई लड़ रहे है।
एक और खबर है जो डॉक्टरों की सुरक्षा को लेकर सवालिया निशान खड़ा कर रही है। हमारे देश के कई इलाकों में हुए डॉक्टरों पर हमले की खबर हमें सोचने पर मजबूर कर देती है कि जो भगवान के रूप में हमारी जान बचाने के लिए आये है उन पर हम हमला कर रहे है। यह खबर हमारे लिए काफी निंदनीय है। हमें इनके लिए हृदय से आभारी होने की आवश्यकता है। क्योंकि अगर इनका मनोबल टूटा तो कोई भी हमें इस संकट से मुक्त नही करा पायेगा।
सिर्फ एक पल इस बात पर विचार कीजिये कि अगर डॉक्टर्स ही इलाज करना छोड़ दे तो कौन हमें इस महामारी से बचाएगा? अगर एक पल भी हम इस बात पर गहराई से मनन चिंतन कर ले तो हमें यह बात अच्छे से समझ आ जायेगी की डॉक्टर्स के बिना मानवीय जीवन इस समय संभव नही है। जिया जज्बे के साथ डॉक्टर्स एवं स्वास्थ्यकर्मी कार्य कर रहे है यह बहुत ही सराहनीय है। डॉक्टर्स पर हुए हमले के बाद भी अगले दिन वो डॉक्टर्स फिर से काम पर आकर लोगों का इलाज करते है। यह हमारे लिए गर्व की बात है। उनके भी परिवार है दोस्त है रिश्तेदार है मगर फिर भी उन सभी से दूरी बनाकर वो आज 18-18 घण्टे की ड्यूटी कर रहे है। 
तो हमारा भी यह फ़र्ज़ बनता है कि हम उनका हौंसला ना तोड़े, उनका सहारा बने उन्हें मजबूती प्रदान करे। क्योंकि अगर इनका हौंसला टूटा ना तो कोई भी हमें कोरोना संकट से मुक्त नही करा पायेगा। में आप लोगों से पुनः अपील करता हूँ कि लॉकडाउन के नियमों का पालन करे। अपने कर्तव्य एवं जिम्मेदारी समझे।
घर रहे। शारिरिक दूरी बनाए रखे। स्वच्छ रहे। सुरक्षित रहे।

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