लोगों से मुलाकात करके संवाद करें- जैसे वे हैं, पोप फ्रांसिस।

55 वें विश्व संचार दिवस का विषय "आओ और देखो" (योहन 1,46) का संदेश, लोगों से मुलाकात कर संवाद करें, वे जहाँ और जैसे हैं। संत पिता फ्रांसिस जानकारी की जोखिम के खिलाफ चेतावनी देते हैं जो हमेशा एक ही होता है। "जहां कोई नहीं जाता है," संत पिता फ्रांसिस वहाँ जाने का आग्रह करते हैं।

"आने और देखने" की मांग "सभी प्रामाणिक मानव संचार की विधि" है। यह 55 वें विश्व संचार दिवस के लिए संत पिता फ्रांसिस के संदेश का विषय है "आओ और देखो" (योहन,1, 46)। संत पिता फ्रांसिस ने पत्रकारों की संरक्षक संत फ्रांसिस डी सेल्स की स्मृति में, आज, जहाँ और जैसे हैं, लोगों से मिलने की घोषणा की। कलीसिया पत्रकारों की संरक्षक संत फ्रांसिस डी सेल्स का त्योहार 24 जनवरी को मनाती है।

"आओ और देखो," ख्रीस्तीय विश्वास का सम्प्रेषण:- विश्व संचार दिवस के संदेश में वह आमंत्रण शामिल है, जो फिलिप ने नथानाएल को संबोधित किया है - "आओ और देखो" संत योहन के सुसमाचार से लिए गये पाठ से जो विषय लिया गया है उसमें तर्क की पेशकश नहीं है लेकिन "प्रत्यक्ष ज्ञान" शामिल है। संत पापा इस बात को रेखांकित करते हैं कि "दो हजार से अधिक वर्षों से यह लोगों के मिलने की एक श्रृंखला है जिसने ख्रीस्तियों के साहसिक कार्यों के आकर्षण का संचार किया है।" दूसरी ओर, "संचार कभी भी व्यक्ति को पूरी तरह देख और प्रकट नहीं कर सकता है।" प्रत्येक "संचार अभिव्यक्ति" जो ईमानदार होना चाहता है, संत पिता फ्रांसिस आज के संचार आकाशगंगाः समाचार पत्रों से वेब तक तथा कलीसिया का साधारण प्रचार जैसे राजनीतिक या सामाजिक संचार को "आने और देखने" का निमंत्रण देते हैं।

"पहले से ही ज्ञात" की धारणा के बाहर:- उनके संदेश में, जुनून और जिज्ञासा के साथ आगे बढ़ने की गतिशीलता का एक मजबूत वजन है। वास्तविक समाचार में प्रवेश करते हुए, संत पिता फ्रांसिस "टीवी और रेडियो समाचारों और वेबसाइटों में" जो कि काफी हद तक समान हैं, में "फोटोकॉपी समाचार पत्रों" के जोखिम के खिलाफ चेतावनी देते हैं, जहां "पूर्व-पैक जानकारी" की धारणा में सही जांच की जानकारी को खो देती है।'' जानकारियाँ जो "चीजों की सच्चाई और लोगों के ठोस जीवन को बाधित करने के लिए कम और कम सक्षम है और अब वे यह नहीं जानते कि सबसे गंभीर सामाजिक घटनाएं या समाज के आधार से मुक्त होने वाली सकारात्मक ऊर्जाओं को कैसे समझें"। इसलिए संत पापा फ्राँसिस के लिए, "प्रकाशन संकट का कारण समाचारों में निर्मित जानकारी है, जो कंप्यूटर के सामने दूसरों के जूतों को पहने बिना निर्मित समाचार है।"

महामारी और दोहरा लेखा:- महामारी का क्षितिज, जिसने 2020 की शुरुआत से दुनिया को अभिभूत कर दिया है, निश्चित रूप से इस संदेश को चिह्नित करता है। संत पिता फ्रांसिस ने चेतावनी दी है कि "दोहरे खातों" को ध्यान में रखते हुए, हर संकट की तरह, "केवल अमीर दुनिया की आंखों के साथ", इसे पुनरावृत्ति करने का जोखिम है। इस अर्थ में, संत पिता फ्रांसिस का विचार सबसे वंचित आबादी के लिए टीके और चिकित्सा उपचार के सवाल पर जाता है। संत पिता फ्रांसिस कहते हैं कि "एशिया, लैटिन अमेरिका और अफ्रीका के सबसे गरीब गांवों में चिकित्सा उपचार के बारे में हमें कौन बताएगा?" यह एक ऐसा खतरा है जो "दुनिया के धनी देशों" को भी प्रभावित करता है, जहां "बहुत सारे परिवार तेजी से गरीबी में फिसल गए हैं, बड़े पैमाने पर छिपे हुए हैं।" संत पिता फ्रांसिस ने कहा कि मानव स्वास्थ्य के अधिकार के सिद्धांत में पुष्टि की गई है कि सभी को स्वास्थ्य का समानाधिकार है लेकिन गरीब हमेशा पिछले होते हैं। संत पापा ने महामारी से उबरने के लिए सभी देशों में कोविड-19 के वैक्सीन के उचित वितरण पर जोर दिया।

भूल गए युद्धों के बारे बताने वाले पत्रकार:- संत पिता ने दिल से सारे संचार कार्यकर्ताओः पत्रकारों, कैमरामैन और संपादकों के जोखिम भरे कामों के लिए धन्यवाद दिया। संत पिता फ्रांसिस ने कहा, "अगर आज हम जानते हैं, उदाहरण के लिए, दुनिया के विभिन्न हिस्सों में सताए गए अल्पसंख्यकों की कठिन स्थिति, गरीबों और सृष्टि के खिलाफ किये गये अन्याय और हिंसा, इतने सारे भूले हुए युद्धों को बताया गया है, तो यह पत्रकारों का साहसपूर्ण कार्य है। अगर उनकी आवाजें कमजोर पड़ जाती तो यह एक खराब स्थिति होती।"

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