असम में हर साल बाढ़ क्यों आती है?

असम इस समय बाढ़ में डूब रहा है। चाय के बागानों से महकने वाला असम इस समय भयंकर बाढ़ का सामना कर रहा है। राज्य के 33 में से 30 जिले बाढ़ की चपेट में हैं और 70 लाख से ज्यादा लोग प्रभावित हुए हैं।  पहले असम में बाढ़ हर साल नहीं आती थी मगर पिछले कुछ सालों से असम राज्य में हर साल भयंकर बाढ़ आती है और इसके कारण वह के लोगों को बड़ी मुसीबतों का सामना करना पड़ता है। असम का सबसे बड़ा काजीरंगा नेशनल पार्क बाढ़ में 95% डूब चूका है। बहुत सारे जानवर मारे जा चुके है। सैकड़ों लोग मरे जा चुके है। हज़ारों गाँव जलमग्न हो चुके है।  लाखों लोगों का घर डूब चूका है लाखों लोग ना चाहते हुए भी कैंप में रहने को मजबूर है। जब पूरा देश कोरोना महामारी का सामना कर रहा है ऐसे वक्त में असम राज्य के सामने एक और बड़ी मुसीबत का सामना कर रहा है।

पहाड़ियों से आने वाला पानी ब्रह्मपुत्र और उसकी सहायक नदियों का जलस्तर अचानक बढ़ा देता है। यही वजह है कि राज्य में सालाना बाढ़ की समस्या गंभीर हो रही है। इसके अलावा भौगोलिक रूप से असम ऐसे जोन में है जहां मानसून के दौरान तो देश के बाकी हिस्सों के मुकाबले ज्यादा बारिश होती ही है।

राष्ट्रीय बाढ़ आयोग के मुताबिक, असम का कुल 31, 500 वर्ग किमी का हिस्सा बाढ़ प्रभावित है। असम का 40% हिस्सा बाढ़ की चपेट में है। असम राज्य की सबसे बड़ी नदी ब्रह्मपुत्र अब भी खतरे के निशान के ऊपर बह रही है। पूरे राज्य में रेड अलर्ट घोषित कर दिया गया है।

यह पहला साल नहीं है जब असम इस तरह के हालातों का सामना कर रहा है। हर साल असम में बाढ़ आती है। हर साल बाढ़ के कारण भयंकर तबाही होती है। लोगों की जान जाती है। हज़ारो करोडो रूपये की संपत्ति का नुक्सान होता है।  लेकिन असम में हर साल ये बाढ़ क्यों आती है इसे समझने के लिए पहले हमें असम की भौगोलिक परिस्थिति को समझना होगा क्योंकि तबाही कब हो या ज्यादा असम में हर साल बाढ़ आना तय होता है।

असम का कुल क्षेत्रफल 78, 438 वर्ग किमी है। असं का लगभग 40% भाग बाढ़ की चपेट  में है। असम हिस्सा पहाड़ी इलाके भूटान और अरुणाचल प्रदेश से लगा हुआ है। असम में तिब्बत से निकलने वाली नदियां अरुणाचल प्रदेश से होकर आती हैं जो बाढ़ लाती हैं। असम में बाढ़ का मुख्य कारण ब्रह्मपुत्र नदी है। ब्रह्मपुत्र नदी एवं इसकी छोटी बड़ी लगभग 49 सहायक नदियाँ है जो असम में बाढ़ लाती है। अरुणाचल प्रदेश से जब ये नदियां असम में प्रवेश करती हैं तो पहाड़ी इलाके से सीधे मैदानी इलाके में आ जाती हैं, जिसकी वजह से तबाही ज्यादा होती है।

 

1. वनों की कटाई: कैचमेंट इलाके में इंसानी बस्तियों के बसने, जंगलों के तेजी से कटने और आबादी बढ़ने की वजह से समस्या की गंभीरता बढ़ गई है।” वनों की कटाई असम बाढ़ का मुख्य कारण है। वनों के काटने से मिट्टी की पकड़ कमजोर हो गयी है और जब बारिश आती है तो मिट्टी पानी के साथ बह जाती है। और अधिक बारिश होने पर बाढ़ की स्थिति बन जाती है।

2. वातावरण परिवर्तन:- वातावरण एवं पर्यावरणीय परिवर्तन भी बाढ़ के मुख्य कारणों में से एक है। समय के साथ वातावरण परिवर्तन एवं पर्यावरण संतुलन न होने की वजह भी बाढ़ को प्रोत्साहन दे रहे है।

3. प्रदुषण: विभिन्न प्रकार के प्रदुषण भी असम में बाढ़ की मुख्य वजह बना हुआ है। विभिन्न प्रकार के प्रदूषणों के कारण वातावरण में तापमान की वृध्दि हो रही है। इसी तापमान में वृद्धि के कारण ग्लेश्यिरों में जमा पानी पिघलता है और अत्यधिक पानी के कारण जब पानी नदी में बहता है और बाढ़ का कारण बनता है।

4. सामान्य से ज्यादा बारिश: सामान्य से ज्यादा बारिश भी असम में बाढ़ का एक कारण है। भारत के उत्तर-पूर्वी इलाकों में अत्यधिक बारिश होने के कारण ब्रह्मपुत्र नदी रौद्र रूप धारण कर लेती है। और यही कारण है की असम हर साल बाढ़ की चपेट में आ जाता है।

5. सामान्य से अधिक आबादी: असं भारत का उत्तर- पूर्वी इलाका है। साल 1940-41 में असम में कई जिलों में ब्रह्मपुत्र घाटी में हर एक किमी के दायरे में 9 से 29 लोग रहते थे। लेकिन, अब यहां हर किमी में 200 लोग रहने लगे हैं। इससे घाटी में हर साल बाढ़ की समस्या बढ़ गई है।

6. डैम/तटबन्ध: विशेषज्ञों का कहना है कि इंसानी गतिविधियों ने भी परिस्थिति को और जटिल बना दिया है। बीते करीब 60 वर्षों के दौरान असम सरकार ने ब्रह्मपुत्र के किनारे तटबंध बनाने पर हज़ारों करोड़ रुपए खर्च किए हैं। डैम एवं तटबन्ध भी असम में बाढ़ का कारण है। क्योंकि डैम एक सिमित मात्रा तक ही वर्षा के जल को रोक सकता है मगर क्षमता से अधिक जल आने के कारण पानी को नहरों में छोड़ना ही पड़ता है और इसी कारण पानी की अधिकता के कारण असम में बाढ़ की स्थिति बन जाती है। इसके साथ ही तटबन्ध भी वर्षा के जल को सिमित मात्रा में रोक सकते है। हर जगह पर तटबन्ध बराबर चौड़ाई के ना होने के कारण भी पानी के बहाव में परिवर्तन होता है और  प्रभाव तटबन्ध पर पड़ता है और तटबन्ध टूट जाता है।

7. भारी मात्रा में गाद: चार देशों से गुजरने वाली ब्रह्मपुत्र नदी असम को दो हिस्सों में बांटती है। तिब्बत से निकलने वाली नदी अपने साथ भारी मात्रा में गाद लेकर आती है। वह गाद धीरे-धीरे असम के मैदानी इलाकों में जमा होता रहता है। इससे नदी की गहराई कम होती है। इससे पानी बढ़ने पर बाढ़ और तटकटाव की गंभीर समस्या पैदा हो जाती है। भारी मात्रा में गाद भी असम में बढ़ का मुख्य कारण है। हर साल गाद को हटाना भी एक मुश्किल कार्य है।

ये मुख्य कारण है जिसकी वजह से असम हर साल बाढ़ का सामना करता है। इसके लिए सरकार को उचित ठोस कदम उठाने की आवश्यकता है। असम में बाढ़ के कारण हर साल लगभग 200 करोड़ एवं जान- माल की हानि होती है। असम को बाढ़ मुक्त बनाने के लिए सरकार को दूरगामी एवं ठोस कदम उठाने की ज़रूरत है। अगर अभी समय रहते सही ठोस कदम नहीं उठाये गए तो आने वाले समय में सभी को इसके भयानक परिणाम देखने को मिल सकते है। असम हमारा ही राज्य है इसके लिए हमें एकजुट होने की आवश्यकता है। हम सभी को मिलकर असं की मदद करने की आवश्यकता है।

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