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83 वर्षीय जेसुइट फादर स्टेन स्वामी की रिहाई की मांग
मानवाधिकार कार्यकर्ता, पुरोहित,धर्मबहनें और देश के विभिन्न क्षेत्रों के लोग"झूठे और मनगढ़ंत मामले" में गिरफ्तार हुए 83 वर्षीय जेसुइट फादर स्टेन स्वामी की रिहाई की मांग करते हुए विभिन्न शहरों और कस्बों में सड़कों पर उतरे। 8 अक्टूबर को उन्हें गिरफ्तार किया गया।
राष्ट्रीय जांच एजेंसी ने 8 अक्टूबर को राजधानी रांची के पास स्थित अपने निवास से फादर स्वामी को गिरफ्तार किया है। पूर्वी भारत में झारखंड राज्य की राजधानी रांची के बाहरी इलाके में रहने वाले फादर स्टेन स्वामी पर आरोप लगाया गया था कि उन्होंने माओवादी विद्रोहियों को अपदस्थ करने और एक साजिश में भाग लेने के लिए प्रेरित किया, जिसके कारण 1 जनवरी, 2018 को भीमा कोरेगांव, महाराष्ट्र राज्य में एक हिंसक टकराव हुआ, जिसमें एक व्यक्ति मारा गया और कई अन्य धायल हुए थे।
मानवाधिकार कार्यकर्ता, पुरोहित,धर्मबहनें और देश के विभिन्न क्षेत्रों के लोग 83 वर्षीय जेसुइट फादर स्टेन स्वामी की रिहाई की मांग के लिए विभिन्न शहरों और कस्बों में सड़कों पर उतरे।
बेंगलुरु में प्रदर्शन
में छूत प्रोटोकॉल का सम्मान करते हुए कर्नाटक राज्य की राजधानी बेंगलुरु में फादर स्टेन स्वामी की रिहाई के लिए 3 किलोमीटर लंबी एक मानव श्रृंखला में महाधर्माध्यक्ष पीटर मचाडो शामिल हुए।
विरोध प्रदर्शन के दौरान महाधर्माध्यक्ष मचाडो ने मीडिया को बताया "फादर स्टेन को रिहा किया जाना चाहिए। सरकार को उसे गरीबों को दी जाने वाली महान सेवा के लिए प्रोत्साहित करना चाहिए था, लेकिन उसे यंत्रणा दी जा रही है।"
प्रदर्शनकारियों ने बीमार परोहित को रिहा करने के लिए सरकारी हस्तक्षेप का आह्वान किया, जिसे 23 अक्टूबर तक 14 दिनों के परीक्षण पूर्व निरोध के अधीन किया गया। फादर स्टेन एक अस्पताल में भर्ती है और सरकार के कोविद -19 विरोधी सुरक्षा प्रोटोकॉल का पालन कर रहे हैं।
तामिलनाडू में प्रदर्शन
फादर स्वामी के गृह राज्य तमिलनाडू में लोगों ने जिला मुख्यालयों के सामने प्रदर्शन किया। हिंदुत्ववादी जनता पार्टी (भाजपा) के अपवाद के साथ सभी दलों के नागरिक अधिकार कार्यकर्ताओं और राजनीतिक नेताओं ने जेल में बंद फादर स्टेन स्वामी को अपना समर्थन देने का वादा किया।
प्रदर्शनकारियों ने सख्त गैरकानूनी गतिविधि रोकथाम अधिनियम को समाप्त करने का आह्वान किया है और कहा कि सरकार और जांच एजेंसियां अनुचित तरीके से फादर स्वामी जैसे लोगों को लक्षित करने के लिए उपयोग कर रही है, जो उत्पीड़ितों की ओर से काम कर रहे हैं, वे इस कृत्य के लिए सरकार की आलोचना करते हैं।
तमिलनाडु में विरोध प्रदर्शनों का समन्वयक फादर ए. संथानम ने उका न्यूज को बताया, "हमें फादर स्वामी पर गर्व है जिन्होंने देश में विशेष रूप से झारखंड में उत्पीड़ित जनजातियों और अन्य लोगों के पक्ष में उनके कार्यों की प्रशंसा करते हैं" । उन्होंने कहा "सरकार को सोचना चाहिए कि उत्पीड़ितों की ओर से बोलने वालों को परेशान करने से मानवाधिकार कार्यकर्ताओं को आतंकित किया जा रहा है। उनका कार्य हमें सही कार्यों का समर्थन करने के लिए प्रोत्साहित करता है।"
फादर के कार्य सरानीय
फ़ादर स्टेन स्वामी के एक सहयोगी कहते हैं कि वो लगातार आदिवासियों के लिए संघर्ष करते आए हैं। फादर स्टेन नक्सली होने के तमगे के साथ जेलों में सड़ रहे 3000 महिलाओं और पुरुषों की रिहाई के लिए हाई कोर्ट गए। आदिवासियों को उनके अधिकारों की जानकारी देने के लिए दूरदराज़ के इलाक़ों में गए।
फ़ादर स्टेन स्वामी ने आदिवासियों को बताया कि कैसे खदानें, बांध और शहर उनकी सहमति के बिना बनाए जा रहे हैं और कैसे बिना मुआवज़े के उनसे ज़मीनें छीनी जा रही हैं।
उन्होंने साल 2018 में अपने संसाधनों और ज़मीन पर दावा करने वाले आदिवासियों के विद्रोह पर खुलकर सहानुभूति जताई थी। उन्होंने नियमित लेखों के ज़रिए बताया है कि कैसे बड़ी कंपनियाँ फ़ैक्टरियों और खदानों के लिए आदिवासियों की ज़मीनें हड़प रही हैं। आज़ादी के बाद से, 17 लाख से अधिक भारतीय पावर स्टेशनों, सिंचाई परियोजनाओं और कारखानों के लिए अपनी ज़मीनों से विस्थापित हुए हैं।
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