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ईश सेवक कार्लो अकुतिस धन्य घोषित
शनिवार को इटली के युवा ईश सेवक कार्लो अकुतिस की धन्य घोषणा असीसी में इताली समयानुसार शाम 4.30 बजे सम्पन्न किया गया। धन्य घोषणा समारोह का अनुष्ठान संत मरिया देली अंजेली में पोप फ्रांसिस के दूत कार्डिनल अगोस्तीनो वाल्लीनी ने किया। उनकी धन्य घोषणा 20 जून को होने वाली थी किन्तु महामारी के कारण स्थगित कर दिया गया था। कार्लो आकुतिस इंटरनेट के संरक्षक माने जाते हैं। वे पवित्र यूखरिस्त के प्रति बड़ी भक्ति रखते थे।
ईश सेवक कार्लो अकुतिस का जन्म लंदन (ग्रेट ब्रिटेन) में 3 मई 1991 को इताली में हुआ था। उनकी माँ का नाम अंद्रेया और पिता का नाम अंतोनियो सालज़ानो है। उन्होंने लंदन में ही दुःखों की माता गिरजाघर में 18 मई को बपतिस्मा प्राप्त किया था। काम के वास्ते लंदन गया परिवार सितम्बर 1991 को इटली के मिलान शहर लौटा। 4 साल की उम्र में उसने स्कूल जाना शुरू किया। अकुतिस ने 16 जून 1998 को 7 साल की छोटी उम्र में पहला परमप्रसाद ग्रहण किया और 24 मई 2003 को दृढ़ीकरण संस्कार लिया।
14 साल की उम्र में जब उन्होंने मिलान के जेस्विट पुरोहितों द्वारा संचालित लेओने संस्थान में दाखिला लिया तब इनके व्यक्तित्व में निखार आया। कम्प्यूटर इंजिनियर के विद्यार्थी के रूप में कार्लो अपने पल्ली के वेबसाईट पर काम करने लगे। अपनी पढ़ाई के साथ-साथ वे पल्ली में बच्चों को दृढ़ीकरण संस्कार के लिए तैयार करने और धर्मशिक्षा देने में भी सहयोग देने लगे। उसी साल उसने लेओ 13वें संस्थान के लिए एक नये वेबसाईट का निर्माण किया, जिसके लिए उन्होंने 2006 के पूरे ग्रीष्म अवकाश को बीताया। उन्होंने पोंटिफिकल अकादमी कुलतोरूम मारतिरूम के लिए भी एक वेबसाईट बनाई।
11 साल की उम्र में कार्लो ने पवित्र यूखरिस्त के चमत्कारों का संग्रह करना शुरू किया जो विभिन्न स्थानों और समय में घटे हैं। उन्होंने इसके लिए अपने कम्प्यूटर ज्ञान और कौशल का प्रयोग किया और एक वैबसाईट बनाया। इसमें 160 चमत्कारों की सूची है। धन्य कार्लो अकुतिस द्वारा निर्मित वेबसाईट आज भी इंटरनेट में मौजूद है जिसको यहाँ क्लिक कर डाऊनलॉड किया जा सकता है।
कार्लो हमेशा अपने मित्रों के आकर्षण का केंद्र रहते थे क्योंकि वे उनकी मदद करने के लिए हमेशा तैयार रहते थे। कार्लो अपना काफी समय असीसी में बीताये जहाँ उसने प्रकृति का सम्मान करना एवं गरीबों की मदद करना सीखा। पवित्र यूखरिस्त पर उनकी बहुत अधिक भक्ति थी। वे कहा करते थे, "पवित्र यूखरिस्त, स्वर्ग जाने के लिए मेरा राजमार्ग है।"
12 अक्टूबर 2006 को सुबह 6.45 बजे एक घातक बीमारी के कारण उनका निधन हो गया। आज के युवा उन्हें अपना आदर्श मान रहे हैं।
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