स्वर्ग की सीढ़ी

आज का त्यौहार, महादूतों का पर्व है। यह पर्व हमारे खीस्तीय जीवन में स्वर्गदूतों के महत्त्व को दर्शाता है। संत महादूत मिखाएल, मायकल (ईश्वर जैसे) प्रार्थनासभा के संरक्षक दूत हैं और उन की विश्वव्यापक कलीसिया के भी संरक्षक महादूत हैं। संत गाब्रिएल (प्रभु के समक्ष प्रस्तुत रहता) जो देहधारण एवं सुसमाचार संदेशवाहक महादूत हैं और सन्त रफाएल (प्रभु ने चंगा किया) पथिकों का मार्गदर्शक महादूत हैं। प्रभु येसु ने कहा - "तुम स्वर्ग को खुला हुआ और ईश्वर के दूतों को मानव- पुत्र के ऊपर चढ़ते - उतरते देखोगे "| स्वर्गदूत - प्रभु के संदेशवाहक हैं, तो प्रभु येसु भी ईश्वर के संदेशवाहक हैं। हमें प्रभु के निरंतर चिन्ह घोषणा एवं लोगों के बीच उनकी उपस्थिति बनने का इन महादूतों की ओर से प्रेरणादायक आह्वान है। जब हम दूसरे परिवारों में जाते हैं, प्रभु के संदेश बनकर जाते है- जिनसे हम मिलते हैं- उनके लिए हमारा सम्पूर्ण जीवन एक संदेश है। क्या हम प्रभु के संदेशवाहक चिन्ह और उपस्थिति बनने के लिए तैयार हैं?

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