रानी एस्तेर की प्रार्थना। 

जब हम कष्ट में रहते हैं तब सभी प्रार्थनाएँ दिल की गहराई से निकलती हैं। रानी एस्तेर भी वही करती हैं एक- दो की मृत्यु नहीं, पर पूरी यहूदी जाति के विनाश का षड्यंत्र था। जिसके लिए रानी से लेकर हर यहूदी बेचैन था। सब मिलकर व्यक्तिगत प्रार्थना, त्याग, तपस्या पिता को चढ़ाते हैं। ईश्वर से एस्तेर व्यक्तिगत प्रार्थना करती है। ईश्वर का स्वभाव क्या है एवं ईश्वर ने यहूदी जाति के लिए क्या- क्या किया है, पूर्वजों से उन्हें यह सब मालूम था। अभी इस अवस्था में वह पूर्ण विश्वास के साथ उस सर्वशक्तिमान पिता से प्रार्थना करती "हे प्रभु तुझे छोड़ मेरा कोई सहारा नहीं । मुझ एकांगिनी की सहायता कर।" 
"माँगो और तुम्हें दिया जायेग; ढूँढ़ो और तुम्हें मिल जायेगा; खटखटाओ और तुम्हारे लिए खोला जायेगा।” इन शब्दों के द्वारा येसु हमें आश्वासन देते हैं। वे अपने दिए वचनों से कभी नहीं मुकरते हैं। अतः हम माँगें पूर्ण विश्वास के साथ जौभी कि हम बुरे, कमजोर, पापी और अविश्वसनीय हों। अपने बच्चों को हम सभी अच्छी चीजें प्रदान करते हैं। हमारी व्यक्तिगत, पारिवारिक, सामाजिक और कलीसियाई आवश्यकताओं को हम पिता से विश्वास के साथ माँगें, जिन्हें पिता ईश्वर हमारे माँगने से पहले ही हमें देने के लिए तत्पर रहते हैं। अंत में येसु स्वर्णिम नियम देते हैं हम दूसरों को खुले मन, दिल से जैसा देंगे, पिता ईश्वर हमारे साथ भी वैसा ही करेंगे। पिता ईश्वर हमारे हृदय को बड़ा और उदार बनावे ताकि हमारे दरवाजे पे आने वाला कोई भी व्यक्ति भूखा न जाये और परिवार के सदस्यों को भी दो जून की रोटी मिल सके।

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