येसु का दूसरा चमत्कार 

येसु ने गलीलिया के काना नगर में अपने दूसरे चमत्कार के द्वारा ईश्वर की महिमा प्रकट की और बहुतों ने ईसा में विश्वास किया। आज के सुसमाचार पाठ में हम देखते हैं कि किस प्रकार येसु ने अपने शब्द मात्र से एक पदाधिकारी के बेटे को चंगाई प्रदान की थी। उस पदाधिकारी के विश्वास को मानना पड़ेगा क्योंकि उसने येसु की बातों पर न केवल विश्वास किया परन्तु पूर्ण विश्वास किया था। येसु तो ईश्वर के परम प्रिय पुत्र थे और उनसे वह बहुत ही प्रसन्न थे जैसा की धर्मग्रंथ साक्ष्य देता है। इसलिए ईश्वर की अनुकम्पा और उसका सामर्थ्य येसु के साथ हमेशा विद्यमान था। येसु इस तथ्य से भी पूर्व परिचित थे। वह जानते थे कि ईश्वर उसके साथ हैं। येसु ने जो कुछ भी किया वह ईश्वरीय इच्छा के अनुसार ही था। उसने अपनी इच्छा और अपने सामर्थ्य से कुछ भी नहीं किया था।
आज का पहला पाठ भी गवाही देता है कि ईश्वर सर्वशक्तिमान और दया से परिपूर्ण है। नबी इसायस के शब्दों से ईश्वर अश्वासन देते हुए कहता है वह एक नये आकाश और नयी पृथ्वी का सृष्टि करेंगे और अपनी सृष्टि को सदा आनन्द और उल्लास प्रदान करेंगे। इसी कार्य को पूरा करने के लिये येसु ने अपने जीवन को समर्पित कर दिया। और अपने जीवन में चंगाई और विभिन्न चमत्कारों के द्वारा इस संसार में आनन्द और उल्लास, शांति और प्रेम प्रदान कर ईश्वर की महिमा प्रकट की। आज हममें से प्रत्येक के लिए एक निमंत्रण दिया जाता है कि हम एक नये आकाश और एक नयी पृथ्वी की तलाश करें।

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