माता- पिता: अनमोल वरदान 

माता - पिता जो हमारे लिए उत्तरदायी हैं शायद बहुत ही कम बार उन्हें याद करते हैं कि कैसे हमारी आत्माओं की देखभाल करते हैं। अच्छा होता कि माता - पिता भी याद करते कि बच्चों पर न केवल उनका अधिकार है बल्कि हमारी आध्यात्मिक भलाई के लिए हमें सर्वशक्तिमान ईश्वर के पास लेकर जाते और बताते कि उन्होंने हमारी आत्मा की भलाई के लिए कितना किया है। दूसरी तरफ हमारे माता - पिताओं को भी एहसास होना चाहिए कि हम भी हमारी आत्मा की देख - रेख करने में उन्हें आनन्द प्रदान करते हैं। ईसा एक भले चरवाहे हैं जिन्होंने हमारी खातिर अपना जीवन दिया है अतः हम उनके द्वारा संचालित किए जाने के लिए अपने को खुला रखें। 
ईसा बिलकुल मानवीय तरीके से अपने शिष्यों से पेश आते हैं। मिशन कार्य के दरमियान कड़ा परिश्रम करने के बाद उन्हें वे बतलाते हैं कि उन्हें क्या करना चाहिए । सर्वप्रथम उन्हें रिपोर्ट देना कि उन्होंने क्या किया और क्या सिखलाया है। ईसा उन्हें एकान्त में प्रार्थना करने के लिये ले जाते हैं। एक प्रेरित ख्रीस्त के संदेशवाहक बनने में तभी सफल हो सकता है जब वह ईश्वर से भरे हृदय को लेकर लोगों के पास आता है। हमें आध्यात्मिक ऊर्जा को चार्ज करने की आवश्यकता होती है। प्रेरित को हमेशा अपने ज्ञान और बुद्धि को तरोताजा करना जरूरी है। बिना मार्गदर्शन के भेड़ अच्छी चरागाह को पाने में नाकामयाब रहती है तथा खतरे से भी सुरक्षित नहीं। एक भले चरवाहे को इन चीजों पर ध्यान देने की आवश्यकता है साथ ही ये आज धर्मसेवा कार्य में सफल होने के कारगार कदम हैं।

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