खुलापन

ईश्वर के समक्ष खुलापन होना मनुष्य के लिए एक बहुत बड़ा गुण है। सच्चाई का पालन करना और जीवन के हर क्षेत्र में सबों के सामने खुलापन का जीवन जीना ईश्वर भक्त होने का प्रमाण भी है। ईश्वर ऐसे ही लोगों को चाहते हैं। ईश्वर हमारे विषय में सब कुछ जानते हैं। उससे कुछ भी बात छिपा नहीं है। 'प्रभु तूने मेरी थाह ली है, तू मुझे जानता है। मैं चाहे लेटू या बैठू तू जानता है' (स्तोत्र 139 : 1-3 )। 
आज का सुसमाचार हमें यह शिक्षा देता है, कि ईश्वर के सामने सब कुछ खुला है, साफ है जैसे दीपक के सामने सभी चीजें साफ दिखाई देती हैं। अत: संसार में जीते वक्त हम भी प्रभु की रोशनी में खुला जीवन जीयें। हम मनुष्य जो भी करते हैं, ईश्वर के लिए वे सभी चीजें प्रकट हैं। ईश्वर के राज्य में सभी चीजें प्रकट हैं, भी छिपा हुआ नहीं है। पारदर्शिता इस राज्य की कसौटी है। माप के विषय में येसु कहते हैं कि जो अपने आप को जितना अधिक उदारता से देता है, उसे उतना ही अधिक फल की प्राप्ति होती है। और जो उदारता नहीं दिखलाता है वह जो कुछ उसे मिला है उसे और उदारता से देने का आनन्द को खो देता है।

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