क्षमा दान 

क्षमा करना दैवी शक्ति है। जो व्यक्ति क्षमा प्राप्त चुका है वही इसकी महत्ता को समझ सकता है। बहुत बार ऐसी परिस्थितियाँ आती हैं कि हम एक दूसरे को क्षमा नहीं कर पाते हैं और क्षमा करना बहुत कठिन हो जाता है। आपसी दूरियाँ बढ़ने लगती हैं और हम एक दूसरे को देखना भी नहीं चाहते हैं। आज के सुसमाचार पाठ में येसु पेत्रुस से कहते हैं, 'यदि तुम में हर एक अपने भाई को पूरे हृदय से क्षमा नहीं करेगा, तो मेरा स्वर्गिक पिता भी तुम्हारे साथ ऐसा ही करेगा।' 
क्रूस पर से येसु ने कहा था, "पिता! इन्हें क्षमा कर, क्योंकि ये नहीं जानते कि क्या कर रहे हैं। "सबसे पहले येसु ने क्षमा प्रदान की और हमारे पापों का बदला चुका दिया। हम तो पाप के कारण मरे हुए ही थे कि येसु ने अपने प्राणों की बलि देकर हमें जीवन दिया है। येसु के मरने के फलस्वरुप सारी मानव जाति को मुक्ति मिलीं मानव जाति इतनी कमजोर थी कि ईश्वर की ओर सिर तक उठा नहीं सकती थीं फिर भी अपनी दयालुता के कारण अपने पुत्र येसु के द्वारा ईश्वर ने हम सबों को पुनः अपना लिया। वही दयालु और क्षमाशील ईश्वर येसु के रक्त से हमें विशुद्ध करते और हमें भी एक दूसरे को क्षमा करने के लिये निमंत्रण देते हैं।
क्षमा करने और क्षमा माँगने से कोई छोटा नहीं हो जाता है। विनम्रतापूर्वक एक दूसरे को अपनाना और क्षमा करना एक दैवी वरदान है। कोई भी व्यक्ति अपनी क्षमता से ऐसा नहीं कर सकता है। ईश्वर भक्त और येसु की दिखाई राह पर चलने वाला हर एक इंसान क्षमा प्रदान करने में सक्षम है। क्योंकि वह ईश्वर से भय खाता और येसु को अपना गुरु मानता है। हमें भी एक दूसरे को क्षमा करनी चाहिए क्योंकि ईश्वर क्षमाशील और प्रेम है।

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