कार्यों के द्वारा ईश्वर की महिमा। 

वर्षों पहले मैं एक बार राँची के ओवर ब्रीज से गुजर रहा था। मैंने एक रिक्शेवाले को देखा जो बड़ी मुश्किल से अपने रिक्शे को खींच रहा है। पसीने से तर, क्योंकि रिक्शे में भारी चीजें लदी थीं। मैं द्रवित हो उठा। उसकी मदद करना चाहा लेकिन दूसरे ही पल याद आया कि मेरे दोनों हाथों में भारी सूटकेस है। मैंने उन्हें किनारे रखा और उसकी मदद की। आज के दूसरे पाठ में संत पौलुस अपनी मुक्ति को दूसरों की मुक्ति के रूप में देखते हैं। वे कहते हैं - धिक्कार मुझे, यदि मैं सुसमाचार का प्रचार न करूँ। येसु के दर्शन के पश्चात् वे पूर्णतया उनके सेवक बन गए और अपनी सारी शक्ति को येसु एवं लोगों की सेवा में लगाया। 
येसु पेत्रुस की सास की चंगाई के द्वारा हमें आध्यात्मिक चंगाई प्रदान करते हैं ताकि हम दूसरों की सेवा के लिए समय दे पाएँ। पाप एक आध्यात्मिक बीमारी है जो दूसरों को प्यार करने और सेवा करने से रोकता है। ईसा हमें सुषुप्त अवस्था से सक्रिय बनाना चाहते हैं। उनके समान हमारा कार्य है ईश्वर के राज्य की घोषणा करना, सुसमाचार का प्रचार करना, रोगियों को चंगाई प्रदान करना और अशुद्ध आत्माओं को प्रार्थना की शक्ति से दूर करना। ईसा हमें बीमारियों से मुक्त करते और चंगाई प्रदान करते हैं । जब हम चिन्ताओं और कठिनाइयों से ग्रसित रहते, तब आशा करते हैं दूसरों से कि वे हमारी मदद करें या सांत्वना दें। लेकिन जब दूसरे कठिनाइयों के दौर से गुजरते हैं तब हम उनसे मिलना और मदद करना, सांत्वना देना नहीं चाहते हैं। इसलिए जब हमें दूसरों से सहायता मिलती है तो हमें भी पेत्रुस की सास की तरह तुरन्त दूसरों की मदद करनी चाहिए। 
एक दिन लियो टॉलस्टॉय यात्रा कर रहे थे। उस दौरान उनके पास बहुत से भिखारी आए और उनके पास जो कुछ था, उन्होंने उसे दान- स्वरूप देकर उनकी मदद की। कुछ समय पश्चात् अचानक एक दूसरा भिखारी आया लेकिन टॉलस्टॉय के पास उसे देने के लिए कुछ नहीं बचा था। उन्होंने अपना प्रेम प्रकट करते हुए उसका आलिंगन किया और कहा भाई मेरे पास आपको देने के लिए कुछ भी नहीं है। आप मुझसे दुःखित न हों। इस पर भिखारी ने उत्तर दिया। मुझे जो चाहिए था, वह मिल गया है, जब आपने मुझे भाई कहा।

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