ईश्वर को आत्मसमर्पण

जो अपना जीवन सुरक्षित रखने का प्रयत्न करेगा, वह उसे खो देगा, और जो उसे खो देगा, वह उसे सुरक्षित रखेगा। सन्त लूकस: 17:33

येसु कभी भी उन चीजों को कहने में संकोच नहीं करते है जो हमें रोकती है। आज के सुसमाचार का यह वाक्यांश उन चीजों में से एक है। वह हमें एक स्पष्ट विरोधाभास के साथ प्रस्तुत करता है। जो अपना जीवन सुरक्षित रखने का प्रयत्न करेगा, वह उसे खो देगा, और जो उसे खो देगा, वह उसे सुरक्षित रखेगा। इसका क्या मतलब है?

यह कथन विशेष रूप से विश्वास और समर्पण के साथ दिल में जाता है। मूल रूप से यदि हम अपने प्रयासों से अपने जीवन और अपने भविष्य को निर्देशित करने की कोशिश करते हैं, तो चीजें काम नहीं करेंगी। जब येसु हमसे अपने जीवन को खोने के विषय में कहते है तो इसका मतलब है कि येसु हमें बता रहे हैं कि हमें अपने आप को उसका त्याग करना चाहिए। यह हमारे जीवन को बचाने का एकमात्र तरीका है। हम इसके द्वारा अपने जीवन को ईश्वर के हाथों में समर्पित करके ईश्वर की इच्छानुसार अपने को उन्हें दे देते है। इससे हमारे जीवन में हमारी नहीं बल्कि ईश्वर की इच्छा पूरी हो। 

विश्वास और समर्पण का यह स्तर पहली बार में बहुत कठिन है। ईश्वर में पूर्ण विश्वास के स्तर पर आना मुश्किल है। लेकिन अगर हम ऐसा कर सकते हैं, तो हम इस तथ्य से चकित होंगे कि हमारे जीवन के लिए ईश्वर के तरीके और योजना हमारे लिए कहीं अधिक बेहतर है जितना कि हम अपने लिए स्वयं अपने लिए तैयार करते हैं। उनकी बुद्धिमत्ता तुलना से परे है और हमारी सभी चिंताओं और समस्याओं के लिए उनका समाधान एकदम सही है।

आज हम स्वयं विचार करें कि आप अपने दयालु ईश्वर को अपने जीवन का पूरा नियंत्रण देने के लिए कितने तैयार और इच्छुक हैं। क्या आप उस पर पूरा भरोसा करते हैं कि उसे पूरा नियंत्रण लेने दें? विश्वास के इस कार्य को सबसे ईमानदारी से करें जो आप कर सकते हैं और देख सकते हैं जैसे वह आपको संरक्षित करना शुरू करता है और आपको इस तरह से फलने-फूलने में मदद करता है जो केवल ईश्वर पर कर सकते हैं।

हे प्रभु, मैं तुम्हें अपना जीवन, अपनी परवाह, अपनी चिंताएं और अपना भविष्य तेरे हाथों में समर्पित करता हूँ। मुझे आप पर पूर्ण भरोसा है। मैं सब कुछ समर्पित करता हूं। आप पर हर दिन और अधिक भरोसा करने और पूर्ण परित्याग में आपकी ओर मुड़ने में मेरी मदद करें। येसु मुझे आप में विश्वास है।

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